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दिन 3,

दिन 3,

पिछले दो दिनों से हमने देखा कि जीवन नमूने के बिना बनना असंभव है|इस समय , नमूने के लिये हुमे एक रूपकार कि आवश्यकता है जिसने  यह जगत ,गृह ,भूमि और जीवन को बनाने कि विस्तृत रूप से योजना की है….

अगर कोई रूपकार है तो ,फिर क्यों वह रूपकार यह विशाल जगत को बनाया और सिर्फ एक ही गृह को असाघरण रूप से प्रगतिशील बनाया ?इस सब के पीछे क्या बड़ी योजना हो सकती है?अचानक से कुछ और प्रश्न उठ सकते है:क्या यह रूपकार ने अपने सृष्टि को बनाकर भाग्य के भरोसे छोड़ दिया?या यह शिल्पकार आपनी सृष्टि लिए अभी भी चिंतित है ?

तो फिर आप इसका मूल्यांकन कैसे करेंगे ?क्या आप को यह नहीं लगता कि इस गृह पर विपत्तिया होने से यह कल्पना करना कठिन है कि रूपकार अब भी अपनी सृष्टि का ख्याल रखता है ?  चुनने की इच्छा के साथ यह प्रणाली बनाई है?एसे जीव बनाये गए जो निर्णय लेने में सवतंत्र है,साथ ही स्वयं स्रजनात्मक हो |येह उस के सामान है जहां वज्ञानिक काल्पनिक कहानियो में रोबोट्स का जिन्दा हो|यह एक गंभीर प्रकार की सृष्टि है;बहुत साहसी प्रकार का नमूना है|रूपकार कि प्रणाली के विरुद्ध निर्णय लेने से चीजें गलत दिशा में जा सकती है|चुनने कि सवतंत्रता के कारण ,जीव रूपकार को नजरअंदाज करने की इच्छा प्रकट कर सकते है

यह रूपकार कोंन है?

क्या पहले से ही कुछ कल्पना है स रूपकार को लेकर?क्या उस को आप में कुछ रूचि है?या आप उसके बनाये गए कई पदार्थ में से एक है?य फिर वह आपकी परवाह करता है और आपके लिए एक योजना बनाई हो ? क्या आप एसे विचारों से भयभीत हो रहे है ?क्या आप उसकी योजना से वाकिफ़ है ?

क्या आप योजनाबद्ध होने का दिखावा कर रहे है ,या बस अपने जीवन के लिए जो सबसे अच्छा है वो कर रहे है ?क्या आप उस प्रकार के प्रश्नों का सामना करने के लिए तयार है ?

उस के नमूने के साथ क्या वह अभी तक शामिल है?यदि है,ओ आप को कैसे मालूम?

सृष्टि बनाने के पीछे क्या उसकी बड़ी योजना है?

क्या रूपकार आपके साथ शामिल है?

क्या आप उसके बडी योजना में ठीक बैठते हो?इसके बारे में आज सोचिये और कृपया करके फिर से आइये

आज इसके बारे में सोचें और कृपया दिन 4 पर वापस आएं

दिन 4 जारी रखें