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कलिसियायें

कलिसियायें

जब आप मसीही बना जाते है तो आवश्यक है की आप स्थानीय चर्च / कलीसिया में जाए. अगर आस पास में कलीसिया नहीं है टी आप और मसीहियों से मिलकर खुर कलीसिया को आरम्भ करसकते है.

कलीसिया का साधारण अर्थ संसार के सारे मसिहियोंका संगठन है. स्थानीय भाशामे कलीसिया का मतलब वह जगह जहां मसीही मिलकर आराधना करते है

जब आप कलीसिया के लिए देखरहे हो तो आप कई सारे कलीसियाओं को देखसकते है. जैसे मनुष्यों में अंतर होता है वैसे ही कलीसियाओं में भी अंतर होती है

कलीसिया को चुना ने के लिए यह बहुत प्राथमिक है की हम उसे चुने जो बाइबल को परमेश्वर का सच्चा वचन मानता हो. अगर कलीसिया के लोग आप से कहते है की बाइबल के अलावा और कोई नियम का पालन करना है, बाइबल अपने आप में सम्पूर्ण नहीं है, या मूर्ति पूजा करना है तो उस कलि सिया से दूर चले जायें.

और लोगों की बर्ताव को देखकर समझ जाए की उस कलीसिया का केंद्र यीशु  है की नहीं. पवित्र आत्मा इन बातों को समझने में आपका सहायता करेगा.

एक अच्छी कलीसिया यीशु  के परिवार जैसा बर्ताव करता है. मसीही एक दूसरे को उभार ते है किहम परमेश्वर की स्तुति करते हुए, उसकी सुसमाचार को बांटते हुए विश्वास में बढें..

कलिसियायें

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जब आप मसीही बना जाते है तो आवश्यक है की आप स्थानीय चर्च / कलीसिया में जाए. अगर आस पास...
बप्तिस्मा

बप्तिस्मा

बप्तिस्मा एक बाहरी संकेत है जिस के द्वारा आप लोगों को बताते है की आप मसीही है. बप्तिस्मा का प्रक्रिया...
प्रार्थना

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प्रार्थना परमेश्वर के साथ और परमेश्वर से वार्तालाप है. जबकि परमेश्वर को सीधी तरह से आप सुन नहीं सकते पर...
पवित्र आत्मा

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बाइबल सिखाती है की परमेश्वर 3 व्यक्तियों में अपने आप का परिचय देता है. इसे त्रियेक्ता कहते है. हम इंसानों...
येशु परमेश्वर का पुत्र

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यीशु को परमेश्वर का पुत्र क्यों कहते है? यीशु ने स्वयं कहा कि वह परमेश्वर का पुत्र है :फिर उन...
येशु का जीवन

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यीशु का जन्म इस्रायेल में २००० साल पहले हुआ |इसके बारे में आप लुका की किताब में पढ़ सकते है...
बाइबल के कुछ उपयोगी पद

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बाइबल, परमेश्वर का पुस्तक

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बाइबल एक साधरण किताब नहीं है |वास्तव में वह एक किताब नहीं है पर ६६ किताबो का किताबघर है |उसमे...
बप्तिस्मा

बप्तिस्मा

बप्तिस्मा एक बाहरी संकेत है जिस के द्वारा आप लोगों को बताते है की आप मसीही है.

बप्तिस्मा का प्रक्रिया बहुत आसान है. आप थोड़े से पानी में खड़े रहे, बैठ जायें या गुठने टेकें. दूसरा मसीही आप को पानी में दुबाकर पानी से बाहर उठाएगा. पिटा पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से आप बप्तिस्मा पायेंगे (अधिक जानकारी के लिए : मत्ती 28:18-19

सरलभाषा में बप्तिस्मा का मतलब विश्वासी केजीवन में हुई आंतरिक बदलाव को गवाही के रूप में पेश करना है. आप के पाप, आप के अपराध मिट गए. और बप्तिस्मा मसीह में आप का मृत्यु, गाड़े जाना और जी उठने को दर्शाता है.

मसीही बप्तिस्मा उद्धार पाने के बाद यीशु  के बात का आज्ञा कारी होने को दर्शाता है. बप्तिस्मा उद्धार के साथ जुदा है लेकिन उद्धार पाने के लिए आवश्यक नहीं है

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बप्तिस्मा

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प्रार्थना

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प्रार्थना

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प्रार्थना परमेश्वर के साथ और परमेश्वर से वार्तालाप है. जबकि परमेश्वर को सीधी तरह से आप सुन नहीं सकते पर आप उन का ध्यान को जो आप पर है समझ सकेंगे.

अपने प्रार्थना में ईमानदार रहें )इब्रानी 10:22. वह पहले से ही जानता है की आप क्या कर रहें है. क्यों की वह तुम्हारा सृजनहार है उस से सम्मान के साथ बात करो.

वह आप से प्रेम रखता है इस कारण आप का सुनेगा. पर क्योंकि वह आप से ज्यादा बुद्धिमान है और उसका सोच आप के सोच से कई ज्यादा बड़ा है, होसकता है उत्तर हमेशा आप के पसंद का नहीं हो.

कई बार आप के जीवन के प्रति परमेश्वर के प्रणाली को समझ ने में ज्यादा वक्त लग जाता है, हो सकता है की आप मुश्किलों को सहेंगे, लोगो के द्वारा ठोकर खायेंगे, या खतरनाक हालात को सहना पड़े . पर आप के प्रार्थना के अनुसार उत्तर अगर नहीं मिला तो  निराश न होना. कई बार परमेश्वर आप के धीरज को परखने के बाद सही और मन चाहा उत्तर देता है.

अपने शारीरिक पिटा के समान परमेश्वर भी अपने बच्चों की सुधि लेता है और चाहता है की हम लम्बी समय तक अच्छाइ प्राप्त करें.

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जब आप मसीही बना जाते है तो आवश्यक है की आप स्थानीय चर्च / कलीसिया में जाए. अगर आस पास...
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प्रार्थना परमेश्वर के साथ और परमेश्वर से वार्तालाप है. जबकि परमेश्वर को सीधी तरह से आप सुन नहीं सकते पर...
पवित्र आत्मा

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पवित्र आत्मा

पवित्र आत्मा

बाइबल सिखाती है की परमेश्वर 3 व्यक्तियों में अपने आप का परिचय देता है. इसे त्रियेक्ता कहते है. हम इंसानों को यह समझना कठिन  है की एक परमेश्वर तीन व्यक्तियों में कैसे रह सकता है क्योंकि एसा और कोई जीव हमारे जानकारी में नहीं है.

इस त्रिएक परमेश्वर के तीन व्यक्ति ; परमेश्वर पिता , परमेश्वर पुत्र और परमेश्वर पवित्र आत्मा है. परमेश्वर पिता सृष्टि कर्ता है ; परमेश्वर पुत्र मध्यस्ता करता है और पवित्र आत्मा परमेश्वर का आत्मा है जो लोगों में वास करता है.

अगर कोई परमेश्वर को अपना सृजनहार मानकर, विश्वास करता है की यीशु  मसीह अपने पापों के लिए मरा तो वह पवित्र आत्मा पाएगा.  

हम पवित्र आत्मा को देख नहीं सकते पट महसूस कर सकते है. परमेश्वर तुम्हारी मार्ग दर्शन करेगा. पवित्र आत्मा तुम्हारी नियंत्रण नहीं करेगा. हम सामान्य मनुष्य बने रहेंगे और अपने निर्णयों को खुद लेंगे पर पवित्र आत्मा कुछ विषयोंके प्रति अपने आखों को खोल देता है. पवित्र आत्मा को पाकर आत्मिक वरदानों को भी पाते है.

पवित्र आत्मा क्या करता है?

•मसीही जीवन में आप का सहायता करेगा. यीशु  के पीछे चलने में और यीशु  जैसा बनाने में सहायता करेगा

•वह परमेश्वर के विषय में सिखाएगा और सत्य के तरफ्र चलाएगा (योहान्ना 16:13-14) (John 16:13-14)

•मसीही होने से पहले जिन विषयों को आप नहीं जानते उन विषयों को वह सिखाएगा  •वह आप के लिए प्रार्थना करेगा (रोमियों :826-27)

दूसरों के साथ सम्बन्ध में जिस तरह ज्यादा समय व्यतीत करने पर ज्यादा एक दूसरों को जान सकते है ठीक उसी तरह परमेश्वर पवित्र आत्मा के साथ ज्यादा समय व्यतीत करने पर उसे ज्यादा महसूस कर सकते है.

पवित्र आत्मा के द्वारा परमेश्वर हमें आत्मिक वरदान भी देता है. उन वरदानों के विषय में अधिक जानकारी 1 कोरिंथी 12 में देख सकते है. यह वरदान आप के लिए फायदे मंद होंगे. आप को अभी उन वरदानों को खोजना नहीं है पर परमेश्वर खुद आप के जरुरत के अनुसार देगा.

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येशु परमेश्वर का पुत्र

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यीशु को परमेश्वर का पुत्र क्यों कहते है? यीशु ने स्वयं कहा कि वह परमेश्वर का पुत्र है :फिर उन...
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येशु परमेश्वर का पुत्र

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यीशु को परमेश्वर का पुत्र क्यों कहते है?

यीशु ने स्वयं कहा कि वह परमेश्वर का पुत्र है :फिर उन सब ने कहा ,क्या फिर आप परमेश्वर के पुत्र है?तो उसने कहा ,आपने सही कहा कि में हूँ |”यीशु ने परमेश्वर को अपना पिता भी कहा है | तभी यह आकाशवाणी हुई: “यह मेरा प्रिय पुत्र है। जिससे मैं अति प्रसन्न हूँ।”(मत्ती३:१७ )परमेश्वर पिता और यीशु पुत्र के करीब संबंध को बताता है लुका १:३२

बाइबल इतिहास में पुत्र का मतलब सम्बन्ध है |दूसरे बाइबल के भागो में यीशु को परमेश्वर का वचन भी कहा गया है |हिब्रू शब्द पुत्र का मतलब है अनुयायी |

जबाप यीशु के अनुयायी बनेगे ,तब आप पवित्र आत्मा को पाएंगे और उसके संतान बनेगे जैसा कि रोमियो में लिखा है (रोमियों ८:१४) जो परमेश्वर की आत्मा के अनुसार चलते हैं, वे परमेश्वर की संतान हैं|

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पवित्र आत्मा

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येशु परमेश्वर का पुत्र

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यीशु को परमेश्वर का पुत्र क्यों कहते है? यीशु ने स्वयं कहा कि वह परमेश्वर का पुत्र है :फिर उन...
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यीशु का जन्म इस्रायेल में २००० साल पहले हुआ |इसके बारे में आप लुका की किताब में पढ़ सकते है...
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परमेश्वर का प्रेम यूहन्ना 3:16 16 परमेश्वर को जगत से इतना प्रेम था कि उसने अपने एकमात्र पुत्र को दे...
बाइबल, परमेश्वर का पुस्तक

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बाइबल एक साधरण किताब नहीं है |वास्तव में वह एक किताब नहीं है पर ६६ किताबो का किताबघर है |उसमे...
येशु का जीवन

येशु का जीवन

यीशु का जन्म इस्रायेल में २००० साल पहले हुआ |इसके बारे में आप लुका की किताब में पढ़ सकते है |पहले ३० साल यीशु यहूदी परम्परा से जीवन व्यतीत किया ,बडई का काम करते हुए |इस समय में सभी इजराइल केसर रोमियो के अधीनता में था ,बेथलेहम भी जहां यीशु का जन्म हुआ और नज़रथ में जहां वह पला-बड़ा|

:तीसवे साल में यीशु ने सामाजिक प्रचार और अस्च्र्यक्रम किये ,फिर भी अपने जन्म स्थान से २०० मील भी दूर नहीं गए |तीन सालो में ही यीशु की प्रतिष्टा पुरे राष्ट्र में फ़ैल गयी |रोमी अधिकारी और इस्रेली नायक उसको देखने लगे|यीशु के मूल वचन :

•यीशु आपसे प्यार करता है और आपके साथ है |

•दूसरे से प्रेम करे |

•हर व्यक्ति का विशाल मूल्य |

•अच्छी खबर:परमश्वर का राज्य धरती पर आगया |

•न्याय कि वास्तविक्ता स्वर्ग से नरक तक |

•जो क्षमा मांगता है उसे क्षमा मिलती है \

यीशु के द्वारा विवादस्पद कार्य यह था कि वह बार बार अपने आप को परमेश्वर बता रहे थे जो रोमी कानून के खिलाफ था|इसलिए रोमी धार्मिक शासन ने उन्हें फांसी देने का फैसला किया |बहुत प्रयास के बाद भी यीशु में कोई भी कानून तोड़ने का काम नहीं किया |फिर भी रोमी शासन ने उसे फांसी डी गयी |

यीशु  को क्रूरता के साथ घायल किया गया और क्रूस पर उस के हाथों को ठोका गया. ऐसा करने से सांस लेना मश्किल बनजाता है और 3 घंटे में जान जा सकती है. (बाइबल लूका 22)

500 से ज्यादा गवाह के अनुसार यीशु  3 दिन बाद मृतकों में से जीउठा और करीब 40 दिन उत्तर और दक्षिण इस्राएल में दिख ते रहे. यह कार्य यीशु  का परमेश्वर होने के दावे को साबित करता है. वह यरूशलेम में, जहां उसे क्रूस पर मार दिया गया था, वापस आकर सब के सामने ज़िंदा आसमान पर उठा लिया गया. (प्रेरितों के काम 1)

इन अद्भुत कार्यों के कारण कई लोग यीशु  पर विश्वास करने लगे. उसी येरुशालेम में एक ही दिन में 3000 लोग यीशु  को मानने लगे. वहां के धर्म गुरु यीशु  के अनुयायियों को सताने लगे, कई सारे अपने जान देने तक तय्यार थे लेकिन यीशु  ओअर अपना विश्वास नहीं खोया. 

100 साल के अन्दर रोमी साम्राज्य (आसिया और यूरोप) पूरी तरह यीशु  को परमेश्वर मानने लगा. 350 वी सदी में रोमी बादशाह कांस्टेंटिन अपने आप को मसीही घोषित किया. 500 साल के अन्दर यूनानी देवी देवताओं के मंदिर मसीही कलीसियाये बनगए. यीशु  के सन्देश और सिक्षा मसीही धर्म के फैल ने से हल्का / पतला होगये पर उन के बातों का ताकत आज भी बरकरार है.

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बप्तिस्मा एक बाहरी संकेत है जिस के द्वारा आप लोगों को बताते है की आप मसीही है. बप्तिस्मा का प्रक्रिया...
प्रार्थना

प्रार्थना

प्रार्थना परमेश्वर के साथ और परमेश्वर से वार्तालाप है. जबकि परमेश्वर को सीधी तरह से आप सुन नहीं सकते पर...
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पवित्र आत्मा

बाइबल सिखाती है की परमेश्वर 3 व्यक्तियों में अपने आप का परिचय देता है. इसे त्रियेक्ता कहते है. हम इंसानों...
येशु परमेश्वर का पुत्र

येशु परमेश्वर का पुत्र

यीशु को परमेश्वर का पुत्र क्यों कहते है? यीशु ने स्वयं कहा कि वह परमेश्वर का पुत्र है :फिर उन...
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परमेश्वर का प्रेम यूहन्ना 3:16 16 परमेश्वर को जगत से इतना प्रेम था कि उसने अपने एकमात्र पुत्र को दे...
बाइबल, परमेश्वर का पुस्तक

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बाइबल एक साधरण किताब नहीं है |वास्तव में वह एक किताब नहीं है पर ६६ किताबो का किताबघर है |उसमे...
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परमेश्वर का प्रेम

यूहन्ना 3:16 16 परमेश्वर को जगत से इतना प्रेम था कि उसने अपने एकमात्र पुत्र को दे दिया, ताकि हर वह आदमी जो उसमें विश्वास रखता है, नष्ट न हो जाये बल्कि उसे अनन्त जीवन मिल जाये। 17 परमेश्वर ने अपने बेटे को जगत में इसलिये नहीं भेजा कि वह दुनिया को अपराधी ठहराये बल्कि उसे इसलिये भेजा कि उसके द्वारा दुनिया का उद्धार हो। 18 जो उसमें विश्वास रखता है उसे दोषी न ठहराया जाय पर जो उसमें विश्वास नहीं रखता, उसे दोषी ठहराया जा चुका है क्योंकि उसने परमेश्वर के एकमात्र पुत्र के नाम में विश्वास नहीं रखा है

सृष्टि

उत्पत्ति 1:1-3 1 आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी को बनाया। 2 पृथ्वी बेडौल और सुनसान थी। धरती पर कुछ भी नहीं था। समुद्र पर अंधेरा छाया था और परमेश्वर की आत्मा जल के ऊपर मण्डराती थी। [a]पहला दिन–उजियाला3 तब परमेश्वर ने कहा, “उजियाला हो” [b] और उजियाला हो गया।यीशु का जन्म लूका 2: 6-14 6 ऐसा हुआ कि अभी जब वे वहीं थे, मरियम का बच्चा जनने का समय आ गया। 7 और उसने अपने पहले पुत्र को जन्म दिया। क्योंकि वहाँ सराय के भीतर उन लोगों के लिये कोई स्थान नहीं मिल पाया था इसलिए उसने उसे कपड़ों में लपेट कर चरनी में लिटा दिया।8 तभी वहाँ उस क्षेत्र में बाहर खेतों में कुछ गड़रिये थे जो रात के समय अपने रेवड़ों की रखवाली कर रहे थे। 9 उसी समय प्रभु का एक स्वर्गदूत उनके सामने प्रकट हुआ और उनके चारों ओर प्रभु का तेज प्रकाशित हो उठा। वे सहम गए। 10 तब स्वर्गदूत ने उनसे कहा, “डरो मत, मैं तुम्हारे लिये अच्छा समाचार लाया हूँ, जिससे सभी लोगों को महान आनन्द होगा। 11 क्योंकि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे उद्धारकर्ता प्रभु मसीह का जन्म हुआ है। 12 तुम्हें उसे पहचान ने का चिन्ह होगा कि तुम एक बालक को कपड़ों में लिपटा, चरनी में लेटा पाओगे।”13 उसी समय अचानक उस स्वर्गदूत के साथ बहुत से और स्वर्गदूत वहाँ उपस्थित हुए। वे यह कहते हुए प्रभु की स्तुति कर रहे थे,14 “स्वर्ग में परमेश्वर की जय हो    और धरती पर उन लोगों को शांति मिले जिनसे वह प्रसन्न है।”यहोवा मेरा चरवाहा है

भजन  23:1-3 डेरिया है।    जो कुछ भी मुझको अपेक्षित होगा, सदा मेरे पास रहेगा।2 हरी भरी चरागाहों में मुझे सुख से वह रखता है।    वह मुझको शांत झीलों पर ले जाता है।3 वह अपने नाम के निमित्त मेरी आत्मा को नयी शक्ति देता है।    वह मुझको अगुवाई करता है कि वह सचमुच उत्तम है।

परमेश्वर से हमें कुछ भी अलग नहीं कर सकता

रोमियों 8:38-39 38 क्योंकि मैं मान चुका हूँ कि न मृत्यु और न जीवन, न स्वर्गदूत और न शासन करने वाली आत्माएँ, न वर्तमान की कोई वस्तु और न भविष्य की कोई वस्तु, न आत्मिक शक्तियाँ, 39 न कोई हमारे ऊपर का और न हमसे नीचे का, न सृष्टि की कोई और वस्तु हमें प्रभु के उस प्रेम से, जो हमारे भीतर प्रभु यीशु मसीह के प्रति है, हमें अलग कर सकेगी।

परमेश्वर का महत्व पूर्ण आज्ञा

मत्ती 22:36-39 36 “गुरु, व्यवस्था में सबसे बड़ा आदेश कौन सा है?”37 यीशु ने उससे कहा, “सम्पूर्ण मन से, सम्पूर्ण आत्मा से और सम्पूर्ण बुद्धि से तुझे अपने परमेश्वर प्रभु से प्रेम करना चाहिये।” [b]38 यह सबसे पहला और सबसे बड़ा आदेश है। 39 फिर ऐसा ही दूसरा आदेश यह है: ‘अपने पड़ोसी से वैसे ही प्रेम कर जैसे तू अपने आप से करता है।’ [c]40 सम्पूर्ण व्यवस्था और भविष्यवक्ताओं के ग्रन्थ इन्हीं दो आदेशों पर टिके हैं।”

कोई भी परमेश्वर और सम्पत्ति को एक साथ सेवा नहीं करसकते

मत्ती 6:24 24 “कोई भी एक साथ दो स्वामियों का सेवक नहीं हो सकता क्योंकि वह एक से घृणा करेगा और दूसरे से प्रेम। या एक के प्रति समर्पित रहेगा और दूसरे का तिरस्कार करेगा। तुम धन और परमेश्वर दोनों की एक साथ सेवा नहीं कर सकते।

अपना परमेश्वर बचाने वाला है

भजन संहिता 68:2-21 वह हमारा परमेश्वर है।वह वही परमेश्वर है जो हमको बचाता है।    हमारा यहोवा परमेश्वर मृत्यु से हमारी रक्षा करता है!21 परमेश्वर दिखा देगा कि अपने शत्रुओं को उसने हरा दिया है।    ऐसे उन व्यक्तियों को जो उसके विरूद्ध लड़े, वह दण्ड देगा

प्रेम

1 कुरिन्थियों 13:1-7 13 यदि मैं मनुष्यों और स्वर्गदूतों की भाषाएँ तो बोल सकूँ किन्तु मुझमें प्रेम न हो, तो मैं एक बजता हुआ घड़ियाल या झंकारती हुई झाँझ मात्र हूँ। 2 यदि मुझमें परमेश्वर की ओर से बोलने की शक्ति हो और मैं परमेश्वर के सभी रहस्यों को जानता होऊँ तथा समूचा दिव्य ज्ञान भी मेरे पास हो और इतना विश्वास भी मुझमें हो कि पहाड़ों को अपने स्थान से सरका सकूँ, किन्तु मुझमें प्रेम न हो 3 तो मैं कुछ नहीं हूँ। यदि मैं अपनी सारी सम्पत्ति थोड़ी-थोड़ी कर के ज़रूरत मन्दों के लिए दान कर दूँ और अब चाहे अपने शरीर तक को जला डालने के लिए सौंप दूँ किन्तु यदि मैं प्रेम नहीं करता तो। इससे मेरा भला होने वाला नहीं है।4 प्रेम धैर्यपूर्ण है, प्रेम दयामय है, प्रेम में ईर्ष्या नहीं होती, प्रेम अपनी प्रशंसा आप नहीं करता। 5 वह अभिमानी नहीं होता। वह अनुचित व्यवहार कभी नहीं करता, वह स्वार्थी नहीं है, प्रेम कभी झुँझलाता नहीं, वह बुराइयों का कोई लेखा-जोखा नहीं रखता। 6 बुराई पर कभी उसे प्रसन्नता नहीं होती। वह तो दूसरों के साथ सत्य पर आनंदित होता है। 7 वह सदा रक्षा करता है, वह सदा विश्वास करता है। प्रेम सदा आशा से पूर्ण रहता है। वह सहनशील है।

भजन संहिता 139 प्रभु आप मुझे जानते है

139 हे यहोवा, तूने मुझे परखा है।    मेरे बारे में तू सब कुछ जानता है।2 तू जानता है कि मैं कब बैठता और कब खड़ा होता हूँ।    तू दूर रहते हुए भी मेरी मन की बात जानता है।3 हे यहोवा, तुझको ज्ञान है कि मैं कहाँ जाता और कब लेटता हूँ।    मैं जो कुछ करता हूँ सब को तू जानता है।

खुश रहो प्रभु निकट है

फिलिप्पियों 4:4-7 4 प्रभु में सदा आनन्द मनाते रहो। इसे मैं फिर दोहराता हूँ, आनन्द मनाते रहो

5 तुम्हारी सहनशील आत्मा का ज्ञान सब लोगों को हो। प्रभु पास ही है। 6 किसी बात कि चिंता मत करो, बल्कि हर परिस्थिति में धन्यवाद सहित प्रार्थना और विनय के साथ अपनी याचना परमेश्वर के सामने रखते जाओ। 7 इसी से परमेश्वर की ओर से मिलने वाली शांति, जो समझ से परे है तुम्हारे हृदय और तुम्हारी बुद्धि को मसीह यीशु में सुरक्षित बनाये रखेगी।

अपना भविष्य नया स्वर्ग लोक और नया संसार

प्रकाशित वाक्य 21:1,2,4 21 फिर मैंने एक नया स्वर्ग और नयी धरती देखी। क्योंकि पहला स्वर्ग और पहली धरती लुप्त हो चुके थे। और वह सागर भी अब नहीं रहा था। 2 मैंने यरूशलेम की वह पवित्र नगरी भी आकाश से बाहर निकल कर परमेश्वर की ओर से नीचे उतरते देखी। उस नगरी को ऐसे सजाया गया था जैसे मानों किसी दुल्हन को उसके पति के लिए सजाया गया हो।

3 तभी मैंने आकाश में एक ऊँची ध्वनि सुनी। वह कह रही थी, “देखो अब परमेश्वर का मन्दिर मनुष्यों के बीच है और वह उन्हीं के बीच घर बनाकर रहा करेगा। वे उसकी प्रजा होंगे और स्वयं परमेश्वर उनका परमेश्वर होगा। 4 उनकी आँख से वह हर आँसू पोंछ डालेगा। और वहाँ अब न कभी मृत्यु होगी, न शोक के कारण कोई रोना-धोना और नहीं कोई पीड़ा। क्योंकि ये सब पुरानी बातें अब समाप्त हो चुकी हैं।”

परमेश्वर पर भरोसा रखो

नीतिवचन 3 अपने पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रख! तू अपनी समझ पर भरोसा मत रख। 6 उसको तू अपने सब कामों में याद रख। वही तेरी सब राहों को सीधी करेगा। 7 अपनी ही आँखों में तू बुद्धिमान मत बन, यहोवा से डरता रह और पाप से दूर रह। 8 इससे तेरा शरीर पूर्ण स्वस्थ रहेगा और तेरी अस्थियाँ पुष्ट हो जायेंगी।

कलिसियायें

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बप्तिस्मा

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येशु परमेश्वर का पुत्र

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येशु का जीवन

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बाइबल के कुछ उपयोगी पद

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बाइबल, परमेश्वर का पुस्तक

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बाइबल, परमेश्वर का पुस्तक

बाइबल, परमेश्वर का पुस्तक

बाइबल एक साधरण किताब नहीं है |वास्तव में वह एक किताब नहीं है पर ६६ किताबो का किताबघर है |उसमे इतिहास ,जीविनी ,कविताये ,भविष्यवाणी ,पत्र आदि है |बाइबल एक बहुत पुरानी  किताब है|कुछ हिस्से ३५०० साल पहले लिखे गए है |इसका यह मतलब नहीं कि बाइबल हमारे जीवन में महत्त्व नहीं रखती |जो कोई भी इसे पध्गा वह आज भी अपने जीवन पर लागु करेगा |

में असमान में से नहीं गिरा

बाइबल जैसे कि हम किताब के रूप में जानते है असमान से नहीं गिरा |बाइबल कि रचना  और आखरी किताब में करीबन १००० साल से जाएदा क अंतराल है |यह एक विभाग और अलग अलग लिखावतो का संग्रह है बाइबल का शब्द यूनानी (बिब्लिका)जिसका मतलब है किताब से लिया गया है |इन किताबो में यहूदी और मसीही पवित्र हथ्लिपि है|यह मुद्रित किताब जैसे कि आप जानते है दो भागो में बटी हुई है ६६ क़िताबे ,अध्याय और हजारों में आईते |यह किताब जिस में दोनों विभाग और अलग अलग लिपि का संग्र्ह है ,इसका लम्बा इतिहास है |बहुत सी घटनाये ,धार्मिक कानून ,कथा ,कहानियाँ और भविष्यवाणी पीढ़ी से पीढ़ी तक मुहबोली आगे बढाया है|

अनेक लेखक
१००० साल से जयेदा के वक्त में बाइबल कि क़िताबे लिखी गयी है ,अंदाजे से १००० bc से १०० nc तक अलग अलग वक्त और जगहों में |अंगिनत लेखकों ने इसके गीत ,संपादन और दूसरे कहानियो से टाएप किया है |यह हाथों के द्वारा ,चमड़े के सामान कागज पर लिखा गया है |सभी मूलपाठ  सुरक्षित नहीं है |वह सब मूलपाठ लम्बे समय के बाद पवित्र हस्तलिपि में जोड़े गए 

सपष्ट और एक सामान नियम पुस्तक क्यों नहीं ?

हम फिर अपनी सविछा पर आते है |यह आपके जीवन कि नियम पुस्तक है,कुछ स्विच्छा संभव है |महत्पूर्ण जीवन कि शिक्षा बाइबल में मिलती है ,और आदेश जो मनुष्य को मानना चाहिए |यह कुछ आदेश मनुष्य के भलाई के लिए ही है |सबसे महत्वपूर्ण आज्ञा है प्रेम (१कोरिन्थियो १३).लोगों के द्वारा दिए गए प्रभु के संदेश ,जीवित हो जाते है |बाइबल के द्वारा हम लोगों और देशो को सविच्छा से संघर्ष करते देख सकते है |जो ईमानदारी से ईश्वर को चुनते है ,वह उसके योजना को खोज लेंगे ,जो लोग इश्वर के ख़िलाफ जाते है उनका कोई भविष्य नही|

अधिक

बाइबल के दो भाग है ,पुराना नियम और नया नियम .पुराने नियम में उन लोगों के बारे में है जिसे ईश्वर ने चुना है ,उनके संधर्ष जिससे वह ईश्वर से विश्वासयोग रहे |पुराने नियम इश्वर के बारे में बहुत पद है|.नया नियम इस धरती पर यीशु के जीवन को बताती है ,अनेक भविष्यवाणी जो पुराने नियम में से पूरी होना .लोगों के द्वारा देखा और जिया हुआ वक्त यीशु के साथ और उसके बाद |इसमें यीशु कि कहानियाँ और शिक्षा उनके क्रूस चढ़ाना और पुनरुथान बताया है| जब आप शुरू से आखरी तक बाइबल पढेंगे ,तब आप सामान डोर को समझेंगे |वह डोर यह कि ईश्वर का अपने स्रष्टि से अत्यंत प्रेम ,आप बहुत एसी कहानियाँ भी पाएंगे जो ईश्वर से मुह्मोड़ लेते है|ईश्वर के पुत्र के द्वारा किये गए उद्धार के कार्य को जो स्वीकार कर्ता है ,तो इश्वर का प्रेम उसके जीवन में म्रत्यु पर जय पता है

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